हाटी समिति राजगढ ने अनुसुचित अधिकार संरक्षण समिति की महा रैली मे वक्ताओ द्वारा प्रयोग की की गई अभ्रद भाषा की कडे शब्दो मे की निदां
राजगढ : खण्ड हाटी समिति राजगढ़ ने अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति द्वारा राजगढ़ में आयोजित रैली में चुने हुए जन प्रतिनिधियों के लिए अभ्रद भाषा के प्रयोग की कडे शब्दो मे निदां की है और सार्वजनिक मंचो के ऐसी भाषा के प्रयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है समिति द्वारा यहा एक पत्रकार वार्ता इसी विषय को लेकर की गई जिसको कैद्रीय हाटी समिति के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश चौहान खंड हाटी समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश चौहान व उपाध्यक्ष विकल्प ठाकुर ने संयुक्त रूप से संबोधित किया
विकल्प ठाकुर का कहना था कि बाहरी लोगों और कुछ संगठनों के द्वारा पिछले कुछ समय से गिरिपार के हाटी समुदाय के बारे में अनर्गल टिप्पणियां की जा रही हैं ।और हाटी समुदाय को उकसाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है । ठाकुर ने कहा कि इस रैली मे एक नारा लगाया जा रहा था हम क्या मांगे आजादी ये पूरा देश जानता है कि इससे पहले यही नारा जे एन यू मे लगा था लेकिन इस समय हाटी समुदाय को धैर्य और शांति से काम लेना चाहिए । समय आने पर हाटी विरोधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जाएगा ।और जो जातिवाद का जहर इस क्षेत्र में घोलने का प्रयास किया जा रहा है उसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा विकल्प ठाकुर ने विभिन्न मुद्दों को लेकर अपना पक्ष रखा और कहा कि हाटी समुदाय का बरसों का संघर्ष अब अपना लक्ष्य प्राप्त करने वाला है । और जो हाटी विरोधी लोग समुदाय के अधिकारों के हनन की कोशिश कर रहे हैं उनके इरादे कभी कामयाब नहीं होंगे । उन्होंने कहा कि हाटी विरोधियों ने अपने राजगढ़ की रैली में जो असंवैधानिक टिप्पणियां की है वो निंदनीय हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर , सांसद सुरेश कश्यप , चौपाल विधायक बलबीर वर्मा , पच्छाद विधायक रीना कश्यप और रेणुका विधायक विनय कुमार पर की गई अशोभनीय टिप्पणियों की हाटी समिति निंदा करती है ठाकुर ने कहा कि एक तरफ तो हाटी विरोधी लोग अपने आप को संविधान को मानने वाला कहते है और दूसरी तरफ उसी संविधान का मजाक उडाते है क्या मुख्यमंत्री, सांसद ,विधायक सवैधानिक पद पर नही बेठे और उनका अपमान करना सविधान का अपमान करना है और पिछले 50 सालो से हाटी समुदाय पर जो सर्वक्षण हुये है उस आधार पर जो रिपोट तैयार की गई है उसको भी शायद संवैधानिक संस्थाओं ने ही तैयार किया होगा और उनकी रिपोटो को गलत ठहराया जा रहा है संविधान को मानने वालो का यह दोहरा मांनदड क्यू ठाकुर ने कहा कि आने वाले चुनावों में हाटी समुदाय ही हिमाचल की सरकार बनाएगा । और जो हाटी विरोधी नेता है उनका पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाएगा । हाटी आंदोलन की भविष्य की योजना समिति द्वारा शीघ्र ही हाटी समुदाय को बताई जाएगी ।
व केन्द्रीय हाटी समिति के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश ठाकुर व खंड हाटी समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश चौहान ने कहा कि यहां इस रैली में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, विधायक रीना कश्यप व बलवीर वर्मा तथा पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप के लिए न केवल अशोभनीय टिप्पणियां की गई बल्कि धमकियां भी दी गई, जिसे सभ्य समाज में कोई भी उचित नहीं मानता है। रैली में नकली हाटी, हमे चाहिए आजादी व खुम्बली प्रथा हो बरबाद जैसे नारे लगाकर जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की संस्कृति को ही नहीं बल्कि लोकतंत्र को ही चुनौती दी गई है, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके कारण समूचे हाटी समुदाय में भारी रोष व्याप्त है। समिति ने हाटी समुदाय से संयम रखने की अपील करते हुए कहा कि जल्द ही हाटी समुदाय को जनजातिय दर्जा मिलने वाला है और उन्हें दिवाली से पहले एक दिवाली मनाने का अवसर मिलेगा। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि अनुसूचित जाति के एक वर्ग विशेष द्वारा जो बाहरी लोगों के बहकावे में आकर समाज में जहर फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके दुष्परिणाम सभी को झेलने पड़ेंगे। समिति ने आरोप लगाया कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का नाम लेकर संविधान की बात करने वाले संवैधानिक संस्थाओं के कार्य को नहीं मानते है और जब उसी संविधान के तहत हाटी समुदाय को जनजातिय दर्जा मिल रहा है तो उसे गलत ठहराने का प्रयास किया जा रहा है। एक तरफ अदालत में मामला ले जाया गया है दूसरी तरफ ऐसी रैलियां करके सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के प्रयासों व माननीय गृहमंत्री अमितशाह के आश्वासन के चलते हाटी समुदाय को पांच दशकों से लंबित जनजातिय दर्जा अवश्य मिलेगा। और विरोध करने वालों को कुछ हासिल नहीं होगा, वह मात्र समाज में जातीय तनाव बढ़ाने का ही कार्य कर रहे है। इस अवसर पर हाटी समिति के रविदत्त भारद्वाज, रत्तन हाब्बी, हरदेव भारद्वाज, व्यापार मंडल अध्यक्ष अरविंद कुमार, राजेन्द्र ठाकुर, अनुज ठाकुर, अरुण चौहान सहित काफी लोग उपस्थित थे ।
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