संजय राजन | सराहां, सिरमौर
सराहां 29 अप्रैल
उपमंडल पच्छाद में विलुप्त होंते जा रहे बान के जंगलों को पुनः स्थापित करने के लिये वन विभाग हिमाचल प्रदेश व वनाचार वेलफेयर ऑफ फ़्लोरा और फयूना फाउंडेशन ने एक सांझा प्रयास किया है।जिसके तहत इलाके की बाग पशोग पंचायत के कवाग धार की पहाड़ियों पर वन विभाग की 36 बीघे जमीन पर बान के बीज की बिजाई करके ।बान के पेड़ उगाए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत 3 हेक्टेयर जमीन पर ढाई क्विंटल बीज की बिजाई जनवरी माह में की गई है। और उम्मीद है कि जुलाई माह तक इसमे ये बीज पौधों का रूप ले लेंगे।यदि यह योजना सिरे चढ़ गई तो इससे न केवल इलाके में विलुप्त हो रहे बान के वनों को संरक्षण मिलेगा बल्कि इससे वातावरण में नमी, पशुओं को चारा व लकड़ी भी उपलब्ध होगी।गौर तलब है कि बान का पेड़ एक ऐसा पेड़ है जो कई तरह से उपयोगी है।
इसका उपयोग जहाँ पालतू पशुओं के चारे के लिये लिये इस्तेमाल किया जाता है वहीं जंगली जानवर भी इसके बीजों को खुश होकर खाते है।माना जाता है कि इसका चारा पशुओं के लिये स्वास्थ्यवर्धक होता है।वहीं इसका पेड़ आसपास के इलाके में नमी बरकरार रखता हैं ।जानकारी देते हुए सराहां वन क्षेत्र के परिक्षेत्र अधिकारी सत पाल शर्मा ने बताया कि उच्च अधिकारियों के आदेश पर वेलफेयर ऑफ फ़्लोरा और फयूना फाउंडेशन के आग्रह पर वन विभाग की 36 बीघा जमीन पर बान के बीज बीजे गये ताकि बान का जंगल स्थापित किया जा सके।विभाग द्वारा संस्था को इस कार्य को पूरा करने के लिये उचित मार्गदर्शन व सहायता प्रदान की गई।
उम्मीद है कि वर्षा ऋतु तक यहाँ पर नर्सरी तैयार हो जाएगी।वही संस्था के संस्थापक निर्मोल कुमार अग्रवाल व नवनीत तिवारी एक पर्यावरण प्रेमी हैं।देश के कई राज्यों में उनकी संस्था वनों के क्षेत्र में कार्य कर रही है।संस्था का मुख्य कार्य पर्यावरण संरक्षण,वनों की रक्षा व इन सबके लिये लोगो को जागरूक करना है।इस कार्य मे वन विभाग की पानवा बीट की वन रक्षक नीलम शर्मा का भी भरपूर योगदान रहा है।




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