छोगटाली में चल रही है 11 दिवसीय शिव महा पुराण कथा

राजगढ़ 21 अगस्त

ब्रहा व विष्णु में भी अपने आपको बड़ा साबित करने के लिए हुआ था द्वंद ।।

छोगटाली मे चल रही शिव महा पुराण कथा में प्रवचन के दौरान बोले आर्चाय इंद्र पाल ।।


×××××××××××××××××

 : मां भवानी मंदिर छोगटाली में ग्यारह दिवसीय श्री शिव महा पुराण कथा में प्रवचन के दौरान आर्चाय इंद्रपाल ने ब्रह्मा व बिष्णु भगवान में अपने आपको बड़ा साबित करने के लिए हुए आपसी द्वंद पर कथा सुनाई। जिसमें ब्रह्मा व विष्णु जब एक दूसरे से स्वयं को बड़ा कहने पर उलझे थे तो शंकर भगवान एक ज्योति रूप में दोनों के मध्य प्रकट हुए। जिसने बाद में खम्बे का रूप धारण किया। ब्रह्मा व विष्णु उसका अंत देखने को अलग अलग दिशा में गए, लेकिन खम्बे का दोनों को अंत नहीं मिला। तब ब्रह्मा ने विष्णु को झूठ बोल दिया कि उसने अंत देख लिया। जिसमें केतकी फूल व गाय ने भी ब्रह्मा का साथ दिया। तब शंकर भगवान ने प्रकट होकर ब्रह्मा केतकी फूल व गाय को झूठी गवाही देने के लिए केतकी फूल व गौ माता को श्राप दिया। जिसे उनकी प्रार्थना पर उन्होंने कम करते हुए कहा कि ब्रह्मा का मात्र एक मंदिर होगा, केतकी फूल सभी देवताओं को चढ़ेगा लेकिन शिव भगवान पर नहीं और गाय के सभी अंग पवित्र होंगे लेकिन मुख अपवित्र होगा कि कथा विस्तार में सुनाई।  आर्चाय इंद्रपाल ने कहा कि सभी के भीतर शिव श्वासों के रूप में विद्यमान है, जब इसमें से शिव निकल जाता है तो व्यक्ति शव हो जाता है। उन्होंने कहा कि शिव की पूजा में तीन चीजें अत्यंत आवश्यक होती है। जिसमें त्रिकुण्ड, रुद्राक्ष व भेल पत्र होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में शिव भक्ति को अपनाने से बेड़ा पार हो सकता है। इस अवसर पर उनके भक्तिगीत 'तेरे दया धर्म नहीं मन मे, मुखड़ा क्या देखे दर्पण में' श्रद्धालू जमकर नाचे।।


टिप्पणियाँ