जिला सिरमौर के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान माता भगायनी की गोद में बसा गांव गेहल में हर वर्ष की भाति इस वर्ष दिवाली पर्व धूम धाम से मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर गांव गेहल निवासी अपने विरदारी दाई चारे के लोगों को आमंत्रित दिया था जो कि अपने आप में अनूठी मिसाल है। गांव गेहल के लोग जिन्हें पजाईक के नाम से जाने जाता है। इस मौके पर ग्रामीणों ने अपने विरादरी दाई चारे के लोगों का वाद्ययंत्रों के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। इनका ये मिलन काफी समय बाद हुआ। स्थानीय लोग ओर दाई चारे के लोगों ने मिलकर नाटी लगाई और ढोल नगाड़ों के साथ सभी झूमे।
गेहल निवासियों का कहना है कि पुराने इतिहास के अनुसार पजाईक लोगों का उदय कहीं शताब्दी पूर्व राजस्थान के उदयपुर से शिमला जिला के महलात व ढेकरा से हुआ है तथा उसके बाद भारत के कईं राज्य में बसना शुरू किया ।
आज के समय में यह खानदान हिमाचल व उत्तराखण्ड कही राज्य में बसे हैं। ये लोग हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में हरिपुरधार के गेहल व पोंटा साहिब के शिवा गांव में बसे है तथा जिला शिमला के ढेकरा, बागना, गई, सैरठी, चन्लोग, कटाह, धार छिडी, महेश मुडं, कलाश, गहलट, गुड छैला, के नजदीक में बसे हुए है। उतराखण्ड राज्य में ये लोग खटावा, चिवा, नागटा, नागदा, पटाला व कई गांव बसे हुए हैं।
गांव गेहल में यह सम्मेलन दिवाली के पावन अवसर पर रखा गया था । गांव वासियों का कहना है कि इस सम्मेलन से हमारे भाईचारे को और मजबूत व अपनी सस्कृति को आने वाली पीढ़ी को रूबरू करा सके इस लिए रखा गया था।
मेहल गांव के युवा नेता यशपाल ठाकुर ने बताया कि ये सभी पजाईक बिरदारी का आपस में मिलना बहुत ही सराहनीय कदम रहा। उनका कहना है कि उनका आने से हमारे गांव की शोभा बढ़ी और अपने रिश्तों नाते ओर भाईचारे को बढ़वा मिला।
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