संगड़ाह :--
बहुआयामी श्री रेणुका बांध परियोजना से विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए खरीदी गई जमीन की निशानदेही का कार्य वीरवार से बांध प्रबंधन एवं राजस्व विभाग के अधिकारी धौलाकुआं के समीप टोकियो नामक स्थान से शुरू करेंगे। बताते चलें की श्री रेणुका बांध जन संघर्ष समिति द्वारा गत वर्ष प्रबंध निदेशक एचपीसीएल को दिए पत्र में मांग की गई थी कि जिन चार स्थानों पर बांध प्रबंधन द्वारा विस्थापितों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए जमीन खरीदी गई है उसकी विडियो रिकॉर्डिंग के साथ निशानदेही करवाई जाए जिस पर विभाग यह कार्य करने के लिए तैयार हो गया है।
हालांकि इन चार स्थानों अंबोया,सैनवाला,टोकियो व चाकली की जमीन को संघर्ष समिति निरस्त कर चुकी है इस जमीन में अबोया नामक स्थान की कुछ जमीन को छोड़ कर बाकी जमीन का कृषि योग्य न होना विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है।
गोरतलब है कि संघर्ष समिति द्वारा करीब 10 वर्ष पूर्व खरिदी गई जमीन की विजीलेंस जांच करवाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व राजा वीरभद्र सिंह के समक्ष आवाज उठाई थी जिसपर इस जमीन की उच्च स्तरीय जांच चली लेकिन कुछ वर्षों के उपरांत यह जांच ठंडे बस्ते में चली गई जिसका अभी तक संघर्ष समिति को किसी भी स्थिति से अवगत नहीं कराया गया।
संघर्ष समिति पिछले 17 वर्षों से विस्थापित होने वाले परिवारों की समस्याओं को सरकार प्रशासन व बांध प्रबंधन के समक्ष रखती आ रही है लेकिन अभी तक विस्थापितों को मात्र एमपीएएफ कार्ड बिकते दिन वितरित किए गए जबकि उस पर मिलने वाले लाभों से विस्थापितों को बांध प्रबंधन आश्वस्त नहीं करा सका।जिस कारण विस्थापितों में बांध प्रबंधन के खिलाफ खासा रोष व्याप्त है।
कार्यकारी महाप्रबंधक सुनील ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि वीरवार को राजस्व विभाग द्वारा टोकियो में निशानदेही का कार्य आरंभ किया जा रहा है इसके उपरांत जैसे ही अन्य स्थानों कि निशानदेही का समय मिलेगा उस हिसाब से संघर्ष समिति को अवगत कराया जाएगा।
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