जिला सिरमौर के लोक गायकों की लगातार हो रही अनदेखी को लेकर आज प्रेस क्लब संगडाह में कलाकारों ने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें बार बार देना पड़ता है ओडिशन पर ओर मंच पर अपना कार्यक्रम पूरा किए बगैर ही कलाकारों को चलता किया जाता है। ये बात गायक कलाकार दिनेश शर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान कही।
उनके प्रमुख मुद्दों को लेकर कहना है कि मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश ने 33% मेलों का बजट हिमाचली कलाकारों पर लगाने का वादा किया है अब देखना यह है कि यह 33% बजट हमारे कलाकारों पर प्रशासन लगता है या नही।
उनका दूसरा मुद्दा है कि जो हमारे कलाकार बंधु ऑडिशन देने जाते हैं उनका एक बार ऑडिशन हो और उनको आने-जाने रहने की उचित व्यवस्था और अच्छा पारिश्रमिक मिले ताकि लोग संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।
तीसरा मुद्दा स्थानीय कलाकारों का जो ऑडिशन कमेटी ले रही है उसमें लोक संस्कृति के परखी कलाकार संगीत के प्रवक्ता हो ताकि लोक संस्कृति का संरक्षण व मेले की शोभा बढ़ सके।
चौथा मुद्दा हिमाचल प्रदेश के कलाकारों से है की शब्दों का चयन जीत के माध्यम से अच्छा हो ताकि आने वाली पीढ़ी उन शब्दों को सुनकर यह कहे कि हमारा कलर हमारी लोक संस्कृति इस प्रकार से है।
होली मेले के ऑडिशन को लेकर कलाकार नाराज
होली मेला पौंटा साहिब में हो रहे ऑडिशंस की प्रक्रिया को लेकर कुछ स्थानीय कलाकार लोग ये देख कर अपनी प्रतिक्रियायें सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैँ कि निर्णायक मंडल में दो सरदारों को बिठा रखा था। ये लड़के 18-20 की उम्र के हैँ और ऑडिशन देने वाले कुछ कलाकार 50-60 की उम्र पार कर चुके हैँ जोकि एक लहजे से गलत भी है क्योंकि इन लड़कों को हमारी संस्कृति, हमारे लोकगीतों, हमारे लोकगायकों का पता नही है।
जो लड़के ऑडिशन ले रहें है वह "सिरमौर की आवाज़" नामक प्रतियोगिता के विजेता हैँ । लोक कलाकारों का कहना है कि हमारे गांव गलियारों में पंजाबी हिंदी तथा पहाड़ी गीतों का गायन करके अपनी छवि कायम कर रहे हैँ, सुरीले हैँ, संगीत के शिक्षक और प्रशिक्षु भी हैं। प्रशासन को इन बालकों से बेहतर निर्णायक मंडल कैसे मिल सकता था। उनका कहना है कि क्या हमारे गुणी कलाकार ख़त्म हो गये हैँ, संगीत के प्रोफेसर, अध्यापकों के पास ऑडिशन लेने का समय नही है। पहले जहाँ ये लोग अपने ऑफिस के किसी भी व्यक्ति को बंदर नाच देखने के लिए बिठा देते थे, वहाँ अब इन नवयुवकों के माध्यम से एक माहौल तो बनेगा कि संगीत के ज्ञाताओं से ऑडिशन प्रक्रिया का ढकोसला निपटाया जा रहा है।
स्थानीय कलाकारों का कहना है कि किसपे कीचड उछाला जाए? इन बालकों पे जिनको इस मनोरंजन के माध्यम से मेले में अपनी परफॉरमेंस देने का अवसर मिल जायेगा, उन कलाकारों पे जो दो साल पहले इसी होली मेले की 2 महीनों बाद आयी 1000-1500 रुपये की भीख़ पर। हमारे शिकायती वीडियो पर चुप्पी साधे बैठे थे, उन बड़े कलाकारों पर जो कहा करते थे कि आप छोटे भाइयों को हम न्याय दिलाएंगे, प्रशासन की आँखे खोलेंगे, आर०टी०आइ० लगाएंगे या फिर प्रशासन पे जो इतने बड़े इवेंट को इस तरह आयोजित करना चाह रहा है।
कब ये अप्रोच वाला कीचड समाप्त होगी, कब तक भाई भतीजावाद और चाटुकारिता के बलबूते पर बेसुरे बेताले कलाकार अपनी जेबे भरते रहेंगे, बिना किसी हिट गीत, बिना सुर संगीत की समझ के स्टार नाईट लेते रहेंगे, कब ये प्रशासन पंजाबी कलाकारों के साथ हम स्थानीय युवकों को भी उचित मानदेय प्रदान करेगा, कब लाखों की सैलेरी ले रहे प्रोफेसर मेलो में हम बेरोजगार कलाकारों का हक़ मारना बंद करेंगे, कब प्रशासन हम लोगों को बिना एप्लिकेशन, बिना ऑडिशन के सम्मान सहित निमंत्रण देगा, कब हमें हमारा मनचाहा समय दिया जायेगा, कब लड़कियों को उनकी अश्लील इंस्टाग्राम पोस्ट्स के बलबूते पर मिल रहे मौकों की जगह हम लड़कों को मंच प्रदान किया जायेगा, कब छोटे छोटे बच्चों को चंद पैसों के लिए मंच का समय खराब करने से रोका जायेगा, कब कलाकार एकजुट होकर अपने हक़ के लिए लड़ेंगे और कब हर चीज़ सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न होगी।
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