स्वर्गीय श्री नित्यानंद सेवल की वार्षिकी पर विशेष


सराहा: संजय रंजन

 दिनांक 10 मार्च 1936 को पं संत राम सेवल एवं माता श्री मति सुख देवी जी के घर, ग्राम देब कोठी, तहसील पछाद, जिला सिरमौर हिमाचल प्रदेश में एक ऐसे आभावान पुत्र रत्न का जन्म हुआ जिनका नामकरण उनके अभिभावकों के द्वारा नित्यानंद सेवल किया गया ! 
               पं. संत राम सेवल अपने नाम के अनुरूप ही एक सोम्य, सुशील एवं धीर गंभीर व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे, जिनके जीवन का मूल लक्ष्य मात्र ज्ञान को अर्जित करना था ! अपनी  ज्ञानार्जन की पिपासा लिए अपने परिवार जनों से दूर रह कर अपनी प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा अमृतसर, पंजाब प्रान्त से पूरी की तथा शास्त्री एवं आयुर्वेदाचार्य की उपाधि प्राप्त की तत्पश्चात आगामी शिक्षा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, काषी से व्याकरणआचार्य की उपाधि प्राप्त की ! वे एक उत्कृष्ट विद्यार्थी होने के साथ साथ एक देश प्रेमी युवा भी थे, जो आजादी के संघर्ष के दौरान जलियांवाला बाग़ प्रकरण के साक्षी रहे ! पं. संत राम सेवल ऐसे विरले व्यक्ति थे, जो अपने समय के सबसे शिक्षित व्यक्ति होने के साथ साथ एक समर्पित समाजसेवी, शिक्षाविद एवं समर्पित पिता थे ! पं. संत राम सेवल ने अपने घर पर ही स्थानीय एवं अन्य स्थानों से आये विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की तथा आयुर्वेद पद्दति से रोगियों का निःशुल्क उपचार करते थे और कालांतर में नैना टिककर में स्थानीय लोगों की सहायता से एक प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की और निःशुल्क शिक्षक के रूप में कार्य किया ! समाज एवं परिवार में एक जिम्मेवार व्यक्तित्व निर्माण में अपना योगदान देते हुए अपने दोनों पुत्रो को उच्च आदर्श युक्त शिक्षा प्रदान की !
               एक स्वस्थ पारिवारिक एवं सामाजिक परम्परा युक्त शिक्षा प्राप्त करने वाले नित्यानंद सेवल बाल्यकाल से ही एक होनहार, ऊर्जावान एवं आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्ति थे ! श्री नित्यानंद सेवल ने अपनी प्राथमिक शिक्षा नैना टिककर से प्राप्त की, माध्यमिक शिक्षा सराहन विद्यालय से प्राप्त करने के पश्चात् राजगढ़ उच्च विद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की ! समाज सेवा को अपने जीवन का मुख्य ध्येय बनाने वाले श्री नित्यानंद, युवावस्था में ही ऐसे लोगो के संपर्क में आ गए जो प्रदेश एवं देश सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य मानते थे ! मात्र 16 वर्ष की छोटी आयु में उस समय के उत्कृष्ट समाजसेवियों के संपर्क में आ गए जिनमे पं. मेध राम, श्री पदमदेव एवं श्री जय बिहारी लाल खाची प्रमुख थे ! स्वतंत्र भारत के प्रथम आम चुनाव में ही अपनी सक्रियता और समाजसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया ! सेवल परिवार से ही जब पं. आनन्द राम सेवल को लोकराज पार्टी से लोकसभा सदस्य का चुनाव लड़ने का अवसर मिला तो युवा नित्यानंद ने अपनी उर्जावान उपस्थिति से सकारात्मक परिणाम में अपनी अहम् भूमिका निभाई और अपने अग्रज पं. आनंद राम सेवल को प्रथम भारतीय संसद में भेजने में एक महत्त्वपूर्ण योगदान दिया ! “होनहार वीरवान के होत चिकने पाद” की लोकोक्ति को चरितार्थ करते हुए, ये निश्चित कर दिया कि आने वाले समय में यह युवा प्रदेश के राजनैतिक पटल पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है ! पहली लोकसभा के आम चुनाव में एक सक्रिय भूमिका निभाने के पश्चात् इस बात में कोई संदेह नहीं रह गया था कि यह युवा उस समय की एक ऐसी शक्सियत की नज़र में आ चुका था, जिसे आज हम सब “हिमाचल निर्माता” के नाम से जानते हैं अर्थात डॉ यशवंत सिंह परमार ! विधिवत रूप से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता लेने के पश्चात् श्री नित्यानंद सेवल ने अपनी क्षमता का परिचय देते हुए पार्टी में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया और पछाद कांग्रेस के मुखिया बने ! ये एक सुखद संयोग ही था कि पछाद से सम्बन्ध रखने वाले डॉ यशवंत सिंह परमार जब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब ये युवा पछाद कांग्रेस के प्रधान थे ! जब एक युवा भारत विश्व पटल पर एक उदियमान सितारे के रूप में उभरने के लिए  अंगड़ाईयां ले रहा था, तब पं. नित्यानंद सेवल के रूप में एक उर्जावान युवा प्रदेश एवं देश की उन्नति के योगदान में होने वाली बहुत सी सामाजिक क्रांतियों के सूत्रधार बनने के लिए बिलकुल तैयार खड़े थे ! इसी कड़ी में जब 1963 में सहकारिता आन्दोलन की शुरुवात हुई तो इन्होने ने बढ़ चढ़ कर इस आन्दोलन में भाग लिया और प्रदेश स्तर पर एक महत्वपूरण भूमिका निभाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नतृत्व करते हुए 1964 में तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री जवाहर लाल नेहरु से मुलाकात करते हुए हिमाचल प्रदेश की वस्तुस्थिति से आवगत करवाया ! 
1977 में जब केंद्र में कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पडा ओर जनता पार्टी की सरकार देश में बनी तो कांग्रेस पार्टी को पुनर्जीवित करने के लक्ष्य से श्रीमती इंदिरा गाँधी पुरे देश के भ्रमण पर निकल पड़ी ! इसी कड़ी में श्री मति इंदिरा गाँधी का हिमाचल आना हुआ और जब उन्होंने अपने लाव लश्कर के साथ सराहां में प्रवेश किया तो किसी भी प्रकार के भाषण का कार्यक्रम नहीं था लेकिन श्री नित्यानंद सेवल ने पार्टी कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय जनता से वायदा किया कि कुछ भी हो वे  श्री मति गाँधी से अवश्य ही वक्तव्य दिलवाएंगे और हुआ भी ऐसा ही ! श्रीमती गाँधी व्यंग्यात्मक भाव से ये कहती हुई मंच पे चढ़ गयी कि “सेवल तुम मानोगे नहीं” और मंच से अपना भाषण दे कर ही आगे के सफ़र पर गई ! उल्लेखनीय है कि जब चिकमंगलूर से श्रीमती इंदिरा गाँधी ने चुनाव लड़ा तो श्री सेवल को हिमाचल प्रदेश से उक्त चुनाव में पार्टी की तरफ से चुनाव प्रचार की जिम्मेवारी मिली जिसे उन्होंने बखूबी निभाया !
अब समय था 1982 के हिमाचल विधान सभा चुनावों का, इन चुनावों में पछाद विधान सभा क्षेत्र से टिकेट के वितरण को लेकर श्री सेवल पार्टी से सहमत नहीं थे और जो भी पर्यवेक्षक क्षेत्र का दौरा करने के लिए आये उन सभी को वस्तुस्थिति से अवगत करवाया लेकिन पार्टी टिकेट को लेकर अडिग रही ! ऐसी परिस्थिति में, श्री सेवल ने अपने सभी सहयोगियों से मिल कर निर्णय लिया की पार्टी लाइन से हट कर एक आज़ाद प्रत्याशी को मैदान में उतारा जाये ! अपनी क्रांतिकारी छवि के अनुरुप पार्टी की सभी चेतावनियों को दर किनार करते हुए अपने राजनैतिक और व्यवसायिक भविष्य को दाव पर रख कर आज़ाद प्रत्याशी श्री गंगू राम मुसाफिर को मैदान में उतारा और हिमाचल प्रदेश की पांचवी विधान सभा में पहुंचा कर ही दम लिया ! इसके पश्चात् कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप एवं केंद्र से लिखित खेद पत्र मिलने के पश्चात् ही पुनः पार्टी की सदस्यता प्राप्त की और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई !
श्री नित्यानंद सेवल ने न केवल कांग्रेस पार्टी में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि प्रत्येक स्तर पर समाज को आगे ले जाने में अपनी जिम्मेवारिओं का निर्वहन किया ! श्री सेवल अखिल भारतीय पंचायत परिषद् के कोषाध्यक्ष रहे ! वे अखिल भारतीय आलू अनुसन्धान परिषद् के सदस्य रहे ! हिमाचल प्रदेश योजना आयोग के सदस्य रहे ! श्री सेवल हिमाचल प्रदेश खादी बोर्ड के सदस्य भी रहे और सहकारी समिति संघ जिला सिरमौर के अध्यक्ष् रहे ! इसके अतिरिक्त खंड विकास परिषद् सराहां के अध्यक्ष रहे तथा उन्होंने 35 वर्षों तक अपनी ग्राम पंचायत नैना टिक्कर के प्रधान पद के रूप में प्रतिनिधित्व किया जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है ! श्री सेवल बहुत लम्बे समय तक पछाद कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और जिला सिरमौर कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी रहे ! एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में श्री सेवल की उप्लब्धियों की फेहरिस्त इतनी लम्बी है की उन्हें शब्दों में व्यक्त करना एक कठिन कार्य है ! वो न केवल एक सफल सामाजिक कार्यकर्ता रहे बल्कि एक कुशल व्यवसाई भी रहे और अपने छोटे भाई स्व. श्री योगेन्द्र मोहन सेवल के साथ मिल कर इनकी व्यवसायिक फर्म का व्यवसाय भारत से बाहर नेपाल तक भी फैला हुआ था लेकिन धन उपार्जन कभी भी इनका मुख्य ध्येय नहीं रहा ! 
हालाँकि इस महान शक्सियत का व्यक्तित्व अनेकों-अनेक उप्लब्धियों से अलंकृत रहा लेकिन फिर भी एक टीस हमेशा रहेगी की जिस स्तर का समर्पण श्री नित्यानंद सेवल का पार्टी एवं समाज के प्रति रहा उसके अनुरूप कभी भी उन्हें वो पद प्राप्त नहीं हुआ जिसके वो हक़दार थे और अगर ऐसा हुआ होता तो शायद आज उनके नाम के साथ और भी कई उपलब्धिया जुडी होती ! एक उत्साह, जोश एवं क्रांतिकारी जज्बे से भरपूर सामाजिक एवं राजनैतिक सफ़र जो 1952 में एक ताज़ा हवा के झोंके की तरह शुरू हुआ था उस सफ़र का अंत 7 अप्रैल 2024 की सुबह 10 बजकर 35 पर समाप्त हो गया और यह सफ़र छोड़ गया कुछ यादें, आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत सी प्रेरणाएं, और छोड़ गया एक मिसाल कि कैसे निःस्वार्थ भाव से प्रदेश एवं देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया जा सकता है !

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