हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों को फ़रवरी माह का वेतन अब तक न मिलने से उनमें गहरा रोष है। प्रशासनिक भवन के बाहर धरना देकर कर्मचारियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र वेतन भुगतान की मांग की।
यह पहली बार हुआ है जब सभी कर्मचारियों को एक तिथि को वेतन नहीं मिल पाया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों को अपने घर के खर्च, बच्चों की फ़ीस और ऋण की किस्तें चुकाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकार की लापरवाही और वित्तीय कुप्रबंधन का ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को कर्ज़ में डुबो दिया है और अब कर्मचारियों के वेतन तक देने में असमर्थ हो रही है। यह सरकार की असफ़लता और नाकामी का बड़ा उदाहरण है।
प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग इस समस्या का समाधान निकालने के बजाय केवल आश्वासन दे रहे हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र वेतन नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार की यह विफ़लता दर्शाती है कि वह कर्मचारियों और आम जनता की परेशानियों को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील है। प्रदेश को इस आर्थिक संकट से उबारने और कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा जनता आने वाले चुनाव में इसका जवाब अवश्य देगी।
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