2024 के राज्यसभा चुनाव में बागी हुए विधायकों की पेंशन बहाल करने के आदेश दिए. हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया है.
हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को हिमाचल हाई कोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है. हिमाचल हाईकोर्ट ने साल 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान बागी हुए विधायकों की पेंशन बहाल करने के आदेश दिए हैं. हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय याचिकाकर्ता को एक महीने के भीतर पेंशन का बकाया जारी करे. साथ ही, भविष्य में देय पेंशन समय पर जारी रहे. उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि तय समय सीमा के भीतर बकाया राशि जारी नहीं की जाती है, तो विधानसभा सचिवालय को बकाया राशि पर 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
हिमाचल हाई कोर्ट ने ये फैसला दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुनाया है. हिमाचल हाई कोर्ट में पूर्व विधायक राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थी. पूर्व विधायकों ने राज्य विधानसभा द्वारा पारित किए गए सदस्यों के भत्ते और पेंशन से जुड़े उस संशोधन विधेयक को चुनौती दी थी, जिसमें दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत अयोग्य घोषित विधायकों की पेंशन समाप्त करने का प्रावधान किया गया था. इसके खिलाफ पूर्व विधायक राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर की ओर से हिमाचल हाई कोर्ट में सिविल रिट याचिका दायर की गई थी.
विधानसभा सचिवालय ने हाई कोर्ट को किया सूचित
हालांकि इस दौरान हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने हिमाचल हाई कोर्ट को बताया गया कि इसी मामले में हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा पहले पारित किए गए विधेयक को राज्य सरकार ने वापस ले लिया है. राज्य विधानसभा ने एक नया विधेयक पास किया है. इस नए विधेयक में प्रावधान किया गया है कि 14वीं विधानसभा या उसके बाद चुने जाने वाले ऐसे विधायक, जो संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किए जाएंगे, उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा. विधानसभा सचिवालय ने हाई कोर्ट को बताया कि नया विधेयक फिलहाल राज्यपाल की मंजूरी के लिए लंबित है. बता दें कि हिमाचल प्रदेश में अयोग्य घोषित हुए 6 पूर्व विधायकों की पेंशन को रोकने संबंधी संशोधन विधेयक मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 2024 में सदन में प्रस्तुत किया था. इसी के खिलाफ पूर्व विधायक कोर्ट गए थे.
कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि 'कानून भविष्य के लिए होते हैं बदले के लिए नहीं. माननीय उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी ने सुक्खू सरकार की हकीकत दुनिया के सामने रखी है. पूर्व विधायकों की पेंशन बहाली न्याय की जीत और तानाशाही की हार है. मुख्यमंत्री राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने के बजाय प्रदेश के हितों पर ध्यान दें.'
कोर्ट के आदेश सुक्खू सरकार के चेहरे पर तमाचा- आशीष शर्मा
न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि 'कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही झूठ गढ़ने, विपक्ष को निशाना बनाने और विरोध करने वाले नेताओं को परेशान करने की नीति अपनाई, लेकिन अब न्यायालय के फैसले ने उनके इस एजेंडे पर सीधा प्रहार किया है. ये फैसला सुक्खू सरकार के चेहरे पर तमाचा है. कांग्रेस ने कानून को बदले का हथियार बनाने की कोशिश की, लेकिन न्यायालय ने साफ कर दिया कि कानून किसी व्यक्ति विशेष को टारगेट करने के लिए नहीं बनाए जाते.'
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